*चलौ पकौड़ा बेंचा जाय...*
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चलौ पकौड़ा बेंचा जाय,
चलौ पकौपकौड़ा बेंचा जाय ॥
पढै -लिखै कै कौन जरूरत,
रोजगार कै सुन्दर सूरत,
दुइ सौ रोज कमावा जाय,
दिन भर मौज मनावा जाय,
कुछौ नही अब सोंचा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
लिखब -पढब कै एसी तैसी,
छोलबै घास, चरऊबै भैंसी,
फीस -फास कै संकट नाहीं,
इस्कूलन कै झंझट नाहीं,
कोऊ कहूँ न गेंछा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
चाय बेंचि कै पीएम बनिहौ,
पक्का भवा न डीएम बनिहौ,
अनपढ़ रहिहौ मजे मा रहिहौ,
ठेलिया लइकै घर -घर घुमिहौ,
नीक उपाय है सोंचा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
रोजगार कै नया तरीका,
कतना सुंदर भव्य सलीका,
का मतलब है डिगरी -डिगरा,
फर्जिन है युह सारा रगरा,
काहे मूड़ खपावा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
मन कै बात सुना खुब भैवा,
उनकै बात गुना खुब भैवा,
आजै सच्ची राह देखाइन,
रोजगार कै अर्थ बताइन,
ठेला आऊ लगवा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
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चलौ पकौड़ा बेंचा जाय,
चलौ पकौपकौड़ा बेंचा जाय ॥
पढै -लिखै कै कौन जरूरत,
रोजगार कै सुन्दर सूरत,
दुइ सौ रोज कमावा जाय,
दिन भर मौज मनावा जाय,
कुछौ नही अब सोंचा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
लिखब -पढब कै एसी तैसी,
छोलबै घास, चरऊबै भैंसी,
फीस -फास कै संकट नाहीं,
इस्कूलन कै झंझट नाहीं,
कोऊ कहूँ न गेंछा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
चाय बेंचि कै पीएम बनिहौ,
पक्का भवा न डीएम बनिहौ,
अनपढ़ रहिहौ मजे मा रहिहौ,
ठेलिया लइकै घर -घर घुमिहौ,
नीक उपाय है सोंचा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
रोजगार कै नया तरीका,
कतना सुंदर भव्य सलीका,
का मतलब है डिगरी -डिगरा,
फर्जिन है युह सारा रगरा,
काहे मूड़ खपावा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
मन कै बात सुना खुब भैवा,
उनकै बात गुना खुब भैवा,
आजै सच्ची राह देखाइन,
रोजगार कै अर्थ बताइन,
ठेला आऊ लगवा जाय,
चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ।।
nice poem
ReplyDeleteha ha ha